पीलिया की बीमारी में लें
ये ख़ास आहार :-
पीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसमे आँखे, त्वचा, यहाँ तक की यूरिन भी पीला होने लगता है। रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाने के कारण यह परिवर्तन होता है।यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक बीमारी या परिस्थिति का लक्षण है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि आपको पीलिया की शिकायत लग रही है या आप इससे ग्रस्त हो गए है तो इसके लिए सबसे अच्छा है की पानी की मात्रा बढ़ा दी जाये। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और उसके बाद अपनी डाइट में कुछ समय के लिए लिक्विड डाइट (liquid) लेना शुरू कर दें ।
पीलिया होने पर जीतना ज्यादा हो सके उतना लिक्विड डाइट (liquid) ली जाए तो इस समस्या में जल्दी राहत मिलती है।
किसी भी बीमारी से उभरने में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यही बात पीलिया के लिए भी उतनी ही सच है।
एलोपैथी में पीलिया के लिए टीकाकरण और दवाइयों द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है लेकिन आयुर्वेद में खान पान में कुछ बदलाव और परहेज कर इस समस्या से जल्दी ठीक होने के बारे में बताया गया है।
पहले तो यह जान लेते हैं की पीलिया के लक्षण कैसे दिखाई देतें है जिससे आम व्यक्ति इसके लक्षणों को देखकर सतर्क हो सके और सही सुचारु रूप से इसका इलाज करवा सके।
लक्षण :-
बुखार
पेट में दर्द
थकान
कमज़ोरी
शरीर में खुजली
शरीर का रंग पीला पड़ना
उल्टी आना
कब्ज़
सिर दर्द होना
पेट में जलन
भूख न लगना
यदि आपको कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अब बात करते हैं की पीलिया की शिकायत होने पर किस प्रकार जीवनशैली और खाने में बदलाव कर इस समस्या से जल्दी राहत मिल सकती है।
क्या खाएं :-
पीलिया के रोगियों को वैसी हरी सब्जियां और खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पच जाए।
खाने में ऐसी सब्जियों का सेवन करो जो खाने में कड़वी हो जैसे की करेला।इसका रस पीलिया के मामले में बहुत फायदेमंद होता है।
मूली का रस :-
आयुर्वेद के चिकित्सकों के अनुसार मूली के रस में इतनी ताकत होती है की वह खून और लिवर से अत्यधिक बिलीरुबिन को निकाल सके। इसलिए पीलिया के रोगी को दिन में कम से कम 2 से 3 गिलास मूली के रस का सेवन करना चाहिए।
टमाटर का रस :-
टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिए यह लाइकोपीन से भरपूर होता है। यह एक प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है जो की लिवर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
आंवले का सेवन :-
आंवले में विटामिन सी पाया जाता है यह लिवर को साफ़ करने में मदद करता है। इसे सूखाकर और वैसे भी यानी की कच्चा भी खाया जा सकता है।दोनों रूप में ये फायदेमंद होता है।
तुलसी की पत्तियां :-
आयुर्वेद में पीलिया के रोग में तुलसी का सेवन बहुत प्रभावी माना गया है।सुबह खाली पेट 4-5 पत्तियां तुलसी की लें ये एक प्राकृतिक तरीका है जो लिवर को साफ़ करने में मदद करता है।
नींबू पानी :-
पीलिया होने पर रोज खाली पेट एक गिलास नींबू पानी का सेवन करें।
नारियल पानी :-
नारियल पानी भी बहुत अच्छा होता है इस रोग में इसलिए इसका सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।
क्या नहीं खाना चाहिए :-
पीलिया के रोग होने पर मसालेदार खाना, नमकीन खाना, तेलयुक्त भोजन, मिठाइयां, मीट मछली, मैदे से बने व्यंजन इत्यादि का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
शराब का सेवन बिलकुल न करे :-
शराब का सेवन तो शरीर के लिए वैसे भी ठीक नहीं होता है लेकिन पीलिया होने पर शराब का सेवन बिलकुल बंद कर दें क्योंकि इस समय शराब ज़हर का काम करता है।
दूषित पानी न पिएं :-
पानी को उबाल कर पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है इसलिए पानी को उबाल कर पिएं और गलती से बासी खाने से बचें।
ये ख़ास आहार :-
पीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसमे आँखे, त्वचा, यहाँ तक की यूरिन भी पीला होने लगता है। रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाने के कारण यह परिवर्तन होता है।यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक बीमारी या परिस्थिति का लक्षण है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि आपको पीलिया की शिकायत लग रही है या आप इससे ग्रस्त हो गए है तो इसके लिए सबसे अच्छा है की पानी की मात्रा बढ़ा दी जाये। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और उसके बाद अपनी डाइट में कुछ समय के लिए लिक्विड डाइट (liquid) लेना शुरू कर दें ।
पीलिया होने पर जीतना ज्यादा हो सके उतना लिक्विड डाइट (liquid) ली जाए तो इस समस्या में जल्दी राहत मिलती है।
किसी भी बीमारी से उभरने में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यही बात पीलिया के लिए भी उतनी ही सच है।
एलोपैथी में पीलिया के लिए टीकाकरण और दवाइयों द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है लेकिन आयुर्वेद में खान पान में कुछ बदलाव और परहेज कर इस समस्या से जल्दी ठीक होने के बारे में बताया गया है।
पहले तो यह जान लेते हैं की पीलिया के लक्षण कैसे दिखाई देतें है जिससे आम व्यक्ति इसके लक्षणों को देखकर सतर्क हो सके और सही सुचारु रूप से इसका इलाज करवा सके।
लक्षण :-
बुखार
पेट में दर्द
थकान
कमज़ोरी
शरीर में खुजली
शरीर का रंग पीला पड़ना
उल्टी आना
कब्ज़
सिर दर्द होना
पेट में जलन
भूख न लगना
यदि आपको कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अब बात करते हैं की पीलिया की शिकायत होने पर किस प्रकार जीवनशैली और खाने में बदलाव कर इस समस्या से जल्दी राहत मिल सकती है।
क्या खाएं :-
पीलिया के रोगियों को वैसी हरी सब्जियां और खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पच जाए।
खाने में ऐसी सब्जियों का सेवन करो जो खाने में कड़वी हो जैसे की करेला।इसका रस पीलिया के मामले में बहुत फायदेमंद होता है।
मूली का रस :-
आयुर्वेद के चिकित्सकों के अनुसार मूली के रस में इतनी ताकत होती है की वह खून और लिवर से अत्यधिक बिलीरुबिन को निकाल सके। इसलिए पीलिया के रोगी को दिन में कम से कम 2 से 3 गिलास मूली के रस का सेवन करना चाहिए।
टमाटर का रस :-
टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिए यह लाइकोपीन से भरपूर होता है। यह एक प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है जो की लिवर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
आंवले का सेवन :-
आंवले में विटामिन सी पाया जाता है यह लिवर को साफ़ करने में मदद करता है। इसे सूखाकर और वैसे भी यानी की कच्चा भी खाया जा सकता है।दोनों रूप में ये फायदेमंद होता है।
तुलसी की पत्तियां :-
आयुर्वेद में पीलिया के रोग में तुलसी का सेवन बहुत प्रभावी माना गया है।सुबह खाली पेट 4-5 पत्तियां तुलसी की लें ये एक प्राकृतिक तरीका है जो लिवर को साफ़ करने में मदद करता है।
नींबू पानी :-
पीलिया होने पर रोज खाली पेट एक गिलास नींबू पानी का सेवन करें।
नारियल पानी :-
नारियल पानी भी बहुत अच्छा होता है इस रोग में इसलिए इसका सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।
क्या नहीं खाना चाहिए :-
पीलिया के रोग होने पर मसालेदार खाना, नमकीन खाना, तेलयुक्त भोजन, मिठाइयां, मीट मछली, मैदे से बने व्यंजन इत्यादि का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
शराब का सेवन बिलकुल न करे :-
शराब का सेवन तो शरीर के लिए वैसे भी ठीक नहीं होता है लेकिन पीलिया होने पर शराब का सेवन बिलकुल बंद कर दें क्योंकि इस समय शराब ज़हर का काम करता है।
दूषित पानी न पिएं :-
पानी को उबाल कर पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है इसलिए पानी को उबाल कर पिएं और गलती से बासी खाने से बचें।
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